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ईडी का बड़ा प्रहार: मिजोरम के चंफाई में एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी, सैकड़ों करोड़ के घोटाले का खुलासा

नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सक्रिय सूखी सुपारी (अरेका नट) की अवैध तस्करी करने वाले एक बहुत बड़े और संगठित सिंडिकेट के खिलाफ गुरुवार को चौतरफा कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने मिजोरम के रणनीतिक सीमावर्ती शहर चंफाई में एक साथ नौ महत्वपूर्ण ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान (छापेमारी) चलाया। इस बड़ी कार्रवाई का मुख्य केंद्र बिंदु म्यांमार से जुड़े इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के प्रमुख स्थानीय गुर्गे, सिंडिकेट के करीबी सहयोगी और उनके व्यावसायिक व आवासीय प्रतिष्ठान हैं। इस औचक कार्रवाई से सीमावर्ती इलाकों के तस्करों में हड़कंप मच गया है।

तियाउ नदी के रास्ते होती थी घुसपैठ, जाली कागजातों से वैध बनाया जाता था माल

ईडी द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, वित्तीय जांच में यह सनसनखेज खुलासा हुआ है कि आरोपी म्यांमार देश से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बहने वाली तियाउ नदी के गुप्त रास्तों का इस्तेमाल कर हर महीने भारी मात्रा में अवैध विदेशी सुपारी भारत की सीमा में लाते थे। तस्करी कर लाए गए इस माल को सबसे पहले चंफाई और आस-पास के स्थानीय गोदामों में गुप्त रूप से डंप किया जाता था। इसके बाद, सिंडिकेट के सदस्य फर्जी ई-वे बिल (e-Way Bill) और जाली परिवहन दस्तावेजों को तैयार करते थे, ताकि इस तस्करी की सुपारी को स्थानीय स्तर पर खरीदी गई वैध सामग्री घोषित कर भारतीय बाजारों में आसानी से खपाया जा सके।

जनजातीय पहचान की आड़ में सीमा शुल्क अधिकारियों को देते थे चकमा

जांच एजेंसी की प्रारंभिक तफ्तीश में यह बेहद चौंकाने वाला पहलू सामने आया है कि इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड और आरोपियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में अपनी स्थानीय जनजातीय (ट्राइबल) पहचान का नाजायज फायदा उठाया। जब कभी कस्टम (सीमा शुल्क) विभाग की टीमें विदेशी सुपारी की खेप को जब्त करती थीं, तो ये आरोपी अधिकारियों के सामने खुद को ‘फ्रंट क्लेमेंट’ (वैध मालिक) के रूप में पेश करते थे। वे जब्त माल को विभाग के चंगुल से छुड़ाने के लिए कई साल पुराने और असंबंधित आयात दस्तावेजों को ढाल बनाते थे और अधिकारियों को गुमराह कर कानूनी कार्रवाई से बच निकलते थे।

मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए खपाए गए सैकड़ों करोड़ रुपये, दस्तावेजों की स्क्रूटनी तेज

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, इस अवैध और प्रतिबंधित सुपारी व्यापार के समानांतर नेटवर्क के जरिए आरोपियों ने पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) अर्जित की है। इस काली कमाई को वैध दिखाने के लिए विभिन्न डमी बैंक खातों, शेल कंपनियों और रियल एस्टेट संपत्तियों में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। चंफाई में चल रही इस छापेमारी के दौरान ईडी की टीमों ने कई आपत्तिजनक वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल सबूत, बेनामी संपत्तियों के कागजात और भारी मात्रा में वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड बरामद किए हैं, जिनकी गहनता से स्क्रूटनी की जा रही है।

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