रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में योजना एवं विकास विभाग की कार्य प्रगति की समीक्षा की। बैठक में विभागीय मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, बजटीय प्रावधानों के बेहतर उपयोग और विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने चालू और आगामी वित्तीय वर्ष की योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक में राज्य में नवाचार आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि इन्नोवेटिव स्कीम के लिए निर्धारित राशि को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये से पांच करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोजेक्ट’ योजना के तहत प्रत्येक जिले की विशेष जरूरतों और संभावनाओं के अनुरूप परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने पुरानी योजनाओं की समीक्षा कर उनकी उपयोगिता का आकलन करने और आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। साथ ही केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) गठित करने पर भी चर्चा की गई।
वित्तीय प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागों को बजटीय राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने 75 प्रतिशत से अधिक बजट व्यय के लक्ष्य पर बल देते हुए कम खर्च करने वाले विभागों की समीक्षा करने के निर्देश दिए।
बैठक में राज्य के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए अगले 10 वर्षों के लिए एक व्यापक विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने पर भी विचार किया गया। इस दस्तावेज के माध्यम से राज्य के विकास की प्राथमिकताओं और भविष्य की रणनीतियों को निर्धारित किया जाएगा।
बैठक में विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, योजना एवं विकास विभाग के सचिव मुकेश कुमार, अपर सचिव विजया जाधव, अपर निदेशक-सह-अपर सचिव कृष्ण नंदन प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
