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ममता बनर्जी को तगड़ा झटका: लोकसभा जाने की तैयारी पर फिरा पानी, यूसुफ पठान ने बहरामपुर सीट से इस्तीफा देने से किया इनकार

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। अब पार्टी सुप्रीमो और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिल्ली की राजनीति में कदम रखने के अपने प्रयासों में एक बड़ा झटका लगा है। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने लोकसभा पहुंचने के लिए बहरामपुर से नवनिर्वाचित सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान से इस्तीफा देने को कहा था, जिसे पठान ने साफ तौर पर खारिज कर दिया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में जाने की योजना बना रही हैं। इसके लिए एक सुरक्षित सीट की तलाश की जा रही थी। बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है, जिसके चलते टीएमसी नेतृत्व का मानना था कि उपचुनाव होने पर ममता बनर्जी यहां से आसानी से जीत दर्ज कर सकती हैं। इसी रणनीति के तहत यूसुफ पठान से सीट खाली करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उनके इनकार के बाद ममता बनर्जी की राह बेहद मुश्किल हो गई है।

जानकारों का मानना है कि यूसुफ पठान के इस्तीफे के बाद भी बहरामपुर से ममता बनर्जी के लिए मुकाबला आसान नहीं होता। इस सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी का लंबा दबदबा रहा है, जिन्हें पिछले लोकसभा चुनाव में यूसुफ पठान ने ही पटखनी दी थी। यदि यहां उपचुनाव होते, तो कांग्रेस की ओर से अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर मजबूत दावेदार बनकर उभरते, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद कड़ा हो जाता। फिलहाल, जब तक टीएमसी का कोई अन्य सांसद अपनी सीट छोड़ने को तैयार नहीं होता, तब तक ममता बनर्जी का लोकसभा पहुंचने का सपना अधर में लटका रहेगा।

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के भीतर बगावत और इस्तीफों का दौर तेजी से बढ़ रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मंत्री फिरहाद हकीम ने शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम के महापौर पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह अपने दायित्वों को सुचारू रूप से निभाने में असमर्थ महसूस कर रहे थे, जिसके कारण उन्होंने ममता बनर्जी की सहमति से यह कदम उठाया है।

टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान के बीच संकट और गहराता दिख रहा है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी के 80 में से करीब 58 विधायक पहले ही बागी रुख अख्तियार कर चुके हैं और उन्होंने विधानसभा में नया नेता विपक्ष तक चुन लिया है। इसके साथ ही, लोकसभा में टीएमसी के करीब 20 सांसदों के भी पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी पर चौतरफा राजनीतिक दबाव बन गया है।

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