कांग्रेस का केंद्र पर हमला: ‘मनरेगा मजदूरों का बकाया जल्द चुकाए सरकार, रुका भुगतान गरीबों के साथ अन्याय’

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने केंद्र सरकार से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत श्रमिकों की लंबित मजदूरी का अविलंब भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की मेहनत की गाढ़ी कमाई को रोककर रखना गरीबों और ग्रामीण परिवारों के साथ सरासर अन्याय है। समय पर भुगतान न होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।

कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले मजदूरों का हक न मारे केंद्र

मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में विजय शंकर नायक ने कहा कि झारखंड का मनरेगा मद में एक बड़ा बकाया केंद्र सरकार के पास लंबित है। इस बकाए में मजदूरों की मजदूरी की एक उल्लेखनीय राशि भी शामिल है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “जिन श्रमिकों ने विपरीत और कठिन परिस्थितियों में धरातल पर काम किया है, उन्हें समय पर उनकी मजदूरी मिलना उनका संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। इसमें किसी भी तरह की देरी कतई स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।”

नई योजनाओं से पहले पुराने बकाए का हो निपटारा

कांग्रेस प्रवक्ता ने मांग की कि झारखंड सहित देश के कई अन्य राज्यों का जो भी लंबित भुगतान है, उसे केंद्र सरकार को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत जारी करना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार द्वारा लाई जा रही नई योजनाओं और बड़ी-बड़ी घोषणाओं से पहले, जो पुराने बकाए लंबित हैं, उनका पूरी तरह निपटारा किया जाना बेहद आवश्यक है। तभी जमीनी स्तर पर काम करने वाले मजदूरों को उनके परिश्रम का उचित प्रतिफल समय पर मिल सकेगा।

खेती-किसानी के सीजन में पैसों की सख्त जरूरत

विजय शंकर नायक ने ग्रामीण परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि यह समय खेती और बुआई का मुख्य सीजन है। ऐसे नाजुक वक्त में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता और समय पर मजदूरी का नकद भुगतान किसानों एवं मजदूरों के लिए जीवन-मरण का सवाल होता है। यदि इस समय मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ, तो इसका सीधा और प्रतिकूल असर खरीफ की खेती-किसानी और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश के गरीब, किसान और मजदूर अब अपने अधिकारों व लंबित मजदूरी को लेकर जागरूक हो चुके हैं और सरकार से सीधा जवाब मांग रहे हैं। केंद्र को इस दिशा में तत्काल कदम उठाते हुए बकाया राशि जारी करनी चाहिए, ताकि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना पर जनता का भरोसा बना रहे।

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