एसीसी सीमेंट प्लांट बंद करने के नोटिस पर भारी बवाल, सड़क पर उतरे हजारों लोग

पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी स्थित ऐतिहासिक एसीसी (ACC) सीमेंट प्लांट को स्थायी रूप से बंद किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ बुधवार को पूरा इलाका जनआंदोलन की आग में सुलग उठा। ‘एसीसी बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले झींकपानी से जिला मुख्यालय चाईबासा तक एक विशाल पदयात्रा निकाली गई। इस आंदोलन में फैक्ट्री के श्रमिकों, उनके परिवारों, स्थानीय ग्रामीणों, छोटे व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने हजारों की संख्या में शामिल होकर उद्योग को बचाने के लिए हुंकार भरी।

16 अगस्त से ताला लगाने का नोटिस, 8 दशक पुराना है नाता

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एसीसी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक संजय बालमुचू और अन्य वक्ताओं ने बताया कि करीब आठ दशक (80 साल) पुराना यह सीमेंट संयंत्र इस पूरे क्षेत्र की लाइफलाइन है। कंपनी प्रबंधन द्वारा आगामी 16 अगस्त से इसे स्थायी रूप से बंद करने का नोटिस जारी कर दिया गया है।

आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि यदि प्रबंधन का यह तानाशाही निर्णय लागू हुआ, तो इसका असर केवल कंपनी के नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि झींकपानी, टोंटो और आसपास के दर्जनों गांवों की पूरी अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।

हजारों परिवारों के चूल्हे बुझने का खतरा, पलायन की आशंका

प्रदर्शनकारियों ने प्लांट बंद होने से पैदा होने वाले गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट को रेखांकित करते हुए कहा:

  • प्रत्यक्ष रोजगार: इस प्लांट से सीधे तौर पर लगभग 1,600 श्रमिक परिवार जुड़े हुए हैं, जिनके सामने अचानक रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
  • अप्रत्यक्ष आजीविका: स्थानीय परिवहन (ट्रक-डंपर एसोसिएशन), होटल, किराना, सब्जी विक्रेता और छोटे-मोटे धंधे करने वाले हजारों अन्य लोगों का व्यवसाय भी पूरी तरह इसी कारखाने पर निर्भर है।
  • पलायन का डर: फैक्ट्री बंद होने से पूरे कोल्हान क्षेत्र में बेरोजगारी का एक बड़ा सैलाब आएगा, जिससे स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को मजबूरन दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ेगा।

उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

यह पदयात्रा बुधवार सुबह एसीसी सीमेंट प्लांट के मुख्य द्वार से शुरू हुई। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारी प्रबंधन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चाईबासा पहुंचे। चाईबासा में संघर्ष समिति के शिष्टमंडल ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त (DC) से मुलाकात की और उनके माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा।

प्रमुख मांगें:

  1. राज्य सरकार तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे और कंपनी प्रबंधन के साथ त्रिपक्षीय उच्चस्तरीय वार्ता बुलाए।
  2. 16 अगस्त से प्लांट बंद करने के नोटिस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
  3. श्रमिकों और स्थानीय रोजगार के हितों की रक्षा के लिए कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।

मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

पदयात्रा से पहले संघर्ष समिति ने आसपास के ग्रामीण इलाकों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया था, यही वजह रही कि भारी संख्या में ग्रामीण भी इस पदयात्रा का हिस्सा बने। समिति ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार और कंपनी प्रबंधन ने समय रहते इस संवेदनशील मामले पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक, उग्र और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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