कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। राज्य के पूर्व मंत्री और उत्तर 24 परगना के कामारहाटी से तृणमूल कांग्रेस विधायक मदन मित्रा ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। इसके बाद वह विधानसभा पहुंचे और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय से मुलाकात की।
‘सही और गलत का फैसला करना पड़ा’
बुधवार सुबह मदन मित्रा स्वयं कार चलाकर विधानसभा पहुंचे। विपक्ष के नेता के कक्ष में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें सही और गलत का फैसला करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि वह अभी भी तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं और जनता के प्रतिनिधि बने रहेंगे, लेकिन पार्टी में मिली सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे चुके हैं।
पार्टी को लेकर जताई नाराजगी
मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि भविष्य में जब पश्चिम बंगाल की राजनीति का इतिहास लिखा जाएगा, तब यह भी दर्ज होगा कि एक व्यक्ति की वजह से 213 सीटें जीतने वाली पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।
हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के साथ काम किया और इसके लिए वह ममता बनर्जी के आभारी हैं।
सभी संगठनात्मक पद छोड़े
मदन मित्रा ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय समिति के चीफ व्हिप, वर्किंग कमेटी, महासचिव समेत पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।
21 जुलाई को होने वाले तृणमूल कांग्रेस के शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह तृणमूल में थे और तृणमूल में ही हैं, लेकिन अब उन्होंने “एक कमरे से दूसरे कमरे” में जाने का फैसला किया है। पहले जहां आराम था, अब उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उनके इस फैसले को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
