नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) तथा सामाजिक सुरक्षा समझौते के लागू होने का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे तथा किसानों, उद्यमियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
प्रधानमंत्री बोले- साझेदारी का महत्वपूर्ण क्षण
प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत-ब्रिटेन साझेदारी के लिए यह महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि सीईटीए और सामाजिक सुरक्षा समझौते के लागू होने से दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाएं ठोस अवसरों में बदलेंगी।
उन्होंने कहा कि सीईटीए से भारतीय किसानों, उद्यमियों और एमएसएमई क्षेत्र को नई गति मिलेगी। साथ ही भारतीय उद्योगों को ब्रिटेन के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी और प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाओं तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा।
भारतीय पेशेवरों को मिलेगा बड़ा लाभ
प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा समझौते से ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय पेशेवरों को महत्वपूर्ण राहत मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियों और कुशल कार्यबल की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच आपसी विश्वास और व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार आधारित साझेदारी का प्रतीक है।
99 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क
इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-ब्रिटेन संबंधों में आज ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। उन्होंने बताया कि सीईटीए लागू होने के बाद भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शून्य सीमा शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा, जिससे लगभग 100 प्रतिशत व्यापार मूल्य को लाभ होगा।
गोयल ने कहा कि इस समझौते से वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्रसंस्कृत खाद्य, एमएसएमई, किसानों और विनिर्माण क्षेत्र को नए अवसर मिलेंगे। वहीं सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएं, शिक्षा और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत ब्रिटेन में अस्थायी नियुक्ति पर जाने वाले भारतीय पेशेवरों को पांच वर्ष तक दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट मिलेगी, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूत होगी।
