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मोतिहारी एमजीसीयू में विश्व जनसंख्या दिवस पर व्याख्यान, युवाओं को बताया सतत भविष्य की कुंजी

मोतिहारी, ।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के सेहत केंद्र द्वारा बुधवार को “विश्व जनसंख्या दिवस” के अवसर पर ‘जनसंख्या, युवा और सतत भविष्य’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव ने की।

  • युवा ही देश का भविष्य : कुलपति

कुलपति प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या इसका मकसद सिर्फ आंकड़े गिनना नहीं, बल्कि जागरूकता, स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास के प्रति जिम्मेदारी समझना है।

उन्होंने कहा “जनसंख्या बढ़ने के साथ संसाधनों पर दबाव और शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार की चुनौतियां भी बढ़ती हैं। हमें युवाओं को जागरूक करना होगा। परिवार नियोजन, बेटी-बेटे में समानता, महिला स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। जनसंख्या नियंत्रण नहीं, बल्कि जनसंख्या सशक्तिकरण ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।”

  • 371 करोड़ युवा देश की ताकत

विशिष्ट वक्ता समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि भारत के पास आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। यूनीसेफ के अनुसार देश में 15 से 29 साल के 37 करोड़ 10 लाख युवा हैं। यही युवा देश के सतत भविष्य की कुंजी बनेंगे।

उन्होंने बताया कि युवाओं की बड़ी संख्या से देश को “जनसांख्यिकीय लाभ” मिल सकता है। लेकिन इसके लिए युवाओं को समय पर शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और रोजगार के अवसर मिलने जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि इस साल की थीम है “युवाओं को एक निष्पक्ष और आशापूर्ण दुनिया में मनचाहे परिवार बनाने के लिए सशक्त बनाना”।

  • संसाधनों का संतुलित उपयोग जरूरी

जंतु विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बुद्धि प्रकाश जैन ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि अपने आप में समस्या नहीं है। संसाधनों का असंतुलित उपयोग और जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती है। उन्होंने “छोटा परिवार, सुखी परिवार” के संदेश को सतत विकास की कुंजी बताया और महिला सशक्तिकरण व बालिका शिक्षा पर जोर दिया।

डॉ. जैन ने युवाओं से अपील की कि वे जागरूकता अभियानों में भाग लें और जनसंख्या संतुलन व पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाएं।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के शोधार्थी महेश कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सेहत केंद्र के समन्वयक डॉ. बबलू पाल ने किया। इस दौरान डॉ. गोविंद प्रसाद वर्मा, डॉ. मणि शंकर द्विवेदी, डॉ. मोहिनी श्रीवास्तव, डॉ. श्यामनंदन सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे।ं

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