यदि घर का बना भोजन खाने के बाद भी बार-बार गैस, पेट में भारीपन, अपच या लगातार थकान महसूस होती है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे लक्षण कभी-कभी प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस (पीएससी) जैसी गंभीर लिवर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। यह एक दुर्लभ लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जो समय के साथ लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
क्या है प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस?
प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलांगाइटिस एक दीर्घकालिक लिवर रोग है, जिसमें लिवर के अंदर और बाहर मौजूद पित्त नलिकाओं में सूजन और सिकुड़न होने लगती है। इसके कारण पित्त का सामान्य प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे लिवर पर लगातार दबाव पड़ता है। समय के साथ यह स्थिति लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और कुछ मामलों में पित्त नलिका के कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकती है।
शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
इस बीमारी के शुरुआती चरण में कई लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि समय के साथ ये समस्याएं सामने आ सकती हैं।
- खाना ठीक से न पचना
- गैस और पेट में भारीपन
- लगातार थकान
- त्वचा में खुजली
- पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द
- भूख कम लगना
- वजन घटना
- आंखों और त्वचा का पीला पड़ना
- संक्रमण होने पर बुखार या ठंड लगना
किन लोगों में अधिक रहता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों के परिवार में पहले यह बीमारी रही हो या जिन्हें इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, विशेषकर अल्सरेटिव कोलाइटिस हो, उनमें इसका जोखिम अधिक हो सकता है। 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों और पुरुषों में भी यह बीमारी अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
इलाज और बचाव
फिलहाल पीएससी का ऐसा उपचार उपलब्ध नहीं है, जिससे बीमारी पूरी तरह समाप्त हो सके। उपचार का उद्देश्य लक्षणों को नियंत्रित करना, संक्रमण से बचाव करना और लिवर को अधिक नुकसान होने से रोकना होता है। समय पर जांच, नियमित चिकित्सकीय निगरानी और विशेषज्ञ की सलाह से गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
कब डॉक्टर से मिलें?
यदि लंबे समय तक अपच, गैस, थकान, खुजली, पीलिया या लिवर से जुड़े अन्य लक्षण बने रहें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या लिवर विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।


