नाग पंचमी हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु नाग देवता और भगवान शिव की आराधना कर सुख-समृद्धि, परिवार की रक्षा और सर्प भय से मुक्ति की कामना करते हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि नाग पंचमी दो बार क्यों मनाई जाती है। आइए जानते हैं इसका कारण और वर्ष 2026 की सही तिथियां।
नाग पंचमी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सावन मास की कृष्ण पक्ष पंचमी 3 अगस्त को है। इस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय से शुरू होकर रात 10:55 बजे तक रहेगी। ओडिशा, बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में इसी दिन नाग पंचमी मनाई जाएगी।
वहीं सावन शुक्ल पक्ष पंचमी 27 अगस्त 2026 को पड़ेगी। इस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय से शुरू होकर शाम 5:00 बजे तक रहेगी। देश के अधिकांश राज्यों में इसी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाने की परंपरा है।
क्यों दो बार मनाई जाती है नाग पंचमी?
सावन मास में पंचमी तिथि दो बार आती है—एक बार कृष्ण पक्ष में और दूसरी बार शुक्ल पक्ष में। अलग-अलग क्षेत्रों की धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के कारण कुछ राज्यों में कृष्ण पक्ष की पंचमी पर, जबकि अधिकांश स्थानों पर शुक्ल पक्ष की पंचमी पर नाग पंचमी मनाई जाती है। यही कारण है कि हर वर्ष नाग पंचमी दो अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है।
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्पदंश का भय दूर होता है और परिवार की रक्षा होती है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उनके लिए इस दिन पूजा और भगवान शिव का रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार राजा जनमेजय के नाग यज्ञ को आस्तिक मुनि ने रुकवाकर नागों की रक्षा की थी। तभी से नाग पंचमी का पर्व मनाने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है। इस दिन आस्तिक मुनि का स्मरण और पूजन भी शुभ माना जाता है।
नाग पंचमी पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- नाग देवता और आस्तिक मुनि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- हल्दी, चंदन, पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
- जल और दूध से अभिषेक करें।
- भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें और नाग देवता से परिवार की सुख-समृद्धि एवं सुरक्षा की प्रार्थना करें।


