चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 से हो रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं। शास्त्रों में चातुर्मास को पूजा, जप, तप, दान और संयम का विशेष समय माना गया है। पद्मपुराण में ऐसे कई कार्य बताए गए हैं, जिन्हें इस दौरान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
चातुर्मास में करें दीपदान
पद्मपुराण के अनुसार चातुर्मास में प्रतिदिन दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है। मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इस अवधि में विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी शुभ फलदायी माना गया है।
पलाश के पत्ते पर करें भोजन
शास्त्रों में चातुर्मास के दौरान पलाश के पत्ते पर भोजन करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इससे अनजाने में हुए पापों का क्षय होता है, जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
भूमि पर शयन का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास में पलंग छोड़कर भूमि पर शयन करना पुण्यदायक माना गया है। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, उन्हें ऐसा करने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
ब्रह्मचर्य और सात्विक जीवन अपनाएं
पद्मपुराण में चातुर्मास के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करने और सात्विक जीवन जीने की सलाह दी गई है। इस अवधि में मांस, मदिरा तथा अन्य तामसिक पदार्थों से दूर रहने का उल्लेख मिलता है। संयम, पूजा-पाठ और धर्म-कर्म को इस समय विशेष महत्व दिया गया है।
धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान श्रद्धा, संयम और सेवा भाव से किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। यह आस्था पर आधारित मान्यता है, जिसे श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार पालन करते हैं।


