पूर्व मेदिनीपुर। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में तृणमूल कांग्रेस संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी अपने कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने के लिए गुप्त बैठकों का सहारा ले रही है। इन बैठकों में पार्टी का झंडा भी नहीं लगाया जा रहा है, ताकि विवादों से बचा जा सके।
चुनावी हार के बाद कमजोर हुआ संगठन
पूर्व मेदिनीपुर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का गृह जिला है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को जिले की सभी 16 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव में भाजपा को करीब 56 प्रतिशत और तृणमूल कांग्रेस को लगभग 40 प्रतिशत मत मिले थे।
चुनाव के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में पार्टी के कई नेता जेल पहुंच चुके हैं, जबकि कई नेताओं ने क्षेत्र में सक्रियता कम कर दी है। इसके अलावा पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी ने भी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
घर-घर संपर्क और बैठकों से संगठन मजबूत करने की कोशिश
पूर्व मंत्री अखिल गिरी और चित्तरंजन माइती जैसे वरिष्ठ नेता संगठन को संभालने में जुटे हैं। फिलहाल बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के बजाय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के घरों में छोटी-छोटी बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
नेता दूरभाष के माध्यम से भी कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रहे हैं। जिले में फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की कोई औपचारिक समिति नहीं है। जिला नेतृत्व पूर्व ब्लॉक अध्यक्षों के माध्यम से बूथ स्तर की जानकारी जुटा रहा है।
इसके अलावा विवाह समारोह, अन्नप्राशन, मेले और पूजा जैसे सामाजिक आयोजनों के जरिए भी नेताओं द्वारा कार्यकर्ताओं से संवाद किया जा रहा है।
अगस्त में समिति गठन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, अगस्त में कालीघाट (ममता) तृणमूल की जिला समिति का गठन किया जा सकता है। दुर्गा पूजा के बाद जिला सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी है। इसके पहले जुलाई के अंत में तमलुक में सभी ब्लॉक नेताओं की बैठक प्रस्तावित है।
तृणमूल नेता और पूर्व मंत्री अखिल गिरी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया जा रहा है, इसलिए उनसे गुप्त रूप से संपर्क बनाए रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही जिला और ब्लॉक स्तर की समितियों की घोषणा की जाएगी।
वहीं, भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का संगठन कमजोर हो चुका है। भाजपा के प्रदेश महासचिव सिंटू सेनापति ने दावा किया कि आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस का पश्चिम बंगाल से पूरी तरह सफाया हो जाएगा।


