नई दिल्ली। एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय हॉकी टीम की नई भगवा (केसरिया) जर्सी को लेकर उठे विवाद के बीच हॉकी इंडिया ने गुरुवार को सफाई दी है। संस्था ने कहा कि जर्सी के रंग में बदलाव खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की सलाह तथा तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
नीली जर्सी से दृश्यता में आ रही थी समस्या
हॉकी इंडिया ने बताया कि खिलाड़ियों और कोचों का मानना था कि पारंपरिक नीली जर्सी अंतरराष्ट्रीय हॉकी में इस्तेमाल होने वाले नीले सिंथेटिक मैदान से काफी मिल जाती थी। इससे खिलाड़ियों को मैदान पर एक-दूसरे की पहचान करने और बेहतर दृश्यता बनाए रखने में परेशानी होती थी।
इसी कारण खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने पीले या केसरिया रंग जैसे विकल्प सुझाए। सभी सुझावों पर चर्चा के बाद केसरिया रंग को अंतिम रूप दिया गया।
केसरिया रंग राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक
हॉकी इंडिया ने कहा कि केसरिया रंग तकनीकी रूप से बेहतर विकल्प होने के साथ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का हिस्सा भी है, जो साहस, त्याग और गौरव का प्रतीक है। संस्था ने स्पष्ट किया कि जर्सी का बदलाव किसी अन्य कारण से नहीं बल्कि खेल संबंधी जरूरतों के आधार पर किया गया है।
हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि टीम की जर्सी में बदलाव पहले भी होते रहे हैं। वर्ष 2014 के एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 विश्व कप में आसमानी नीले रंग की जर्सी का इस्तेमाल किया गया था।
पूर्व कप्तान ने उठाए सवाल
पूर्व भारतीय कप्तान विरेन रास्किन्हा ने भगवा रंग की जर्सी पर सवाल उठाते हुए इसे भारतीय हॉकी की पारंपरिक पहचान से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम की पहचान हमेशा नीली जर्सी रही है और प्रशंसक भी टीम को इसी रंग में देखना पसंद करते हैं।
गौरतलब है कि नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय पुरुष और महिला टीमें पहली बार पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरिया रंग की नई किट में मैदान पर उतरेंगी।


