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बिहार बनेगा एआई हब: मंत्रिपरिषद ने ‘बिहार आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस मिशन’ को दी मंजूरी

पटना : नई सरकार के गठन के बाद मंगलवार को पहली मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य में ‘बिहार आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस मिशन’ को स्थापित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुये मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 10 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गयी। मंत्रिपरिषद की बैठक के उपरांत पारित किये गये प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने दी। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि बिहार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिये ‘बिहार आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस मिशन’ की स्थापना की जा रही है। एआई सामाजिक और आर्थिक रूप से एक परिवर्तनकारी तकनीक बन चुका है, इसलिये शोध, नवाचार और अग्रणी उद्योगों के सहयोग से बिहार को इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के सामाजिक, आर्थिक और क्षेत्रीय प्रगति को नई गति मिलेगी। बिहार सरकार एआई के क्षेत्र में शोध, नवाचार, प्रशिक्षण और उद्योग सहयोग को बढ़ाते हुये राज्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रमुख केंद्र बनाना चाहती है, जिससे विकास की नई संभावनायें खुलें और जनता को बेहतर सेवायें मिल सके। मुख्य सचिव ने पारित प्रस्तावों की जानकारी देते हुये बताया कि बिहार में 25 नयी चीनी मिलें खोली जायेंगी। पहले से 9 चीनी मिल बंद पडी हैं। पारित प्रस्ताव के तहत राज्य में नये चीनी मिलों की स्थापना और पुराने बंद पड़े चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने से जुड़े नीति निर्धारण और कार्य योजना के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में 11 नये टाउनशिप विकसित किये जायेंगे। इनमें 9 प्रमंडलीय मुख्यालयों के अलावा सीतामढ़ी और सोनपुर को भी शामिल किया गया है। इस पहल का उद्देश्य शहरी विकास को गति देना और आधुनिक सुविधाओं से युक्त नये शहरी केंद्र तैयार करना है। मुख्य सचिव श्री अमृत ने बताया कि बिहार को पूर्वी भारत का नया टेक हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी की स्थापना का निर्णय लिया गया है। इसके लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया जायेगा। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ परामर्शी के रूप में शामिल रहेंगे। यह कमिटी आगामी 6 माह के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। मुख्य सचिव ने बताया कि बदलते बिहार के विकास की गति को बल देने के लिये बिहार में प्रौद्योगिकी और सेवा आधारित नवाचारों की न्यू ऐज इकोनॉमी के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये इस क्षेत्र की बिहार से संबंध रखने वाले अग्रणी उद्यमियों के सुझाव प्राप्त कर योजनाओं और नीतियों का निर्धारण किया जायेगा। साथ ही बिहार को एक ‘वैश्विक बैक एंड हब’ और ‘ग्लोबल वर्क प्लेस’ के रूप में विकसित और स्थापित करने के लिये महत्वपूर्ण विभागों और प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के सहयोग से एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जायेगी।

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