मां भद्रकाली मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, प्राचीन विरासत और 1968 की मूर्ति चोरी की कहानी आज भी आकर्षण का केंद्र

चतरा। इटखोरी स्थित ऐतिहासिक मां भद्रकाली मंदिर में सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर से सामने आईं ताज़ा तस्वीरों में माता भद्रकाली का आकर्षक श्रृंगार, पूजा-अर्चना और मंदिर परिसर की ऐतिहासिक जानकारी अंकित शिलालेख श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। हाल के दिनों में भी मंदिर धार्मिक पर्यटन और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

तीन धर्मों के संगम की अनूठी पहचान

मंदिर परिसर में लगे शिलालेखों के अनुसार इटखोरी का मां भद्रकाली मंदिर हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के संगम का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध ने यहां साधना की थी, जबकि जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर शीतलनाथ से भी इस स्थल का संबंध बताया जाता है। परिसर में सहस्रलिंगी शिवलिंग, प्राचीन बौद्ध स्तूप, पालकालीन प्रतिमाएं और पुरातात्विक अवशेष इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं।

1968 की मूर्ति चोरी आज भी चर्चा का विषय

मंदिर परिसर में लगे विवरण के अनुसार 22 नवंबर 1968 की रात मां भद्रकाली की प्राचीन अष्टधातु प्रतिमा चोरी हो गई थी। इसके बाद बिहार और कोलकाता पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मामले की जांच हुई। शिलालेखों में उल्लेख है कि इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई तथा चोरी की गई प्रतिमा को विदेश भेजने की साजिश का भी खुलासा हुआ। यह घटना आज भी मंदिर के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है।

धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र

मां भद्रकाली मंदिर झारखंड के प्रमुख शक्ति स्थलों में शामिल है। प्रत्येक वर्ष यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इटखोरी महोत्सव और विभिन्न धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां विशेष भीड़ रहती है। राज्य सरकार भी इस क्षेत्र को धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

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