Homeअन्तर्राष्ट्रीयविपक्ष की एकता से बचा लोकतंत्र : प्रियंका

विपक्ष की एकता से बचा लोकतंत्र : प्रियंका

नई दिल्ली। कांग्रेस मुख्यालय में शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में प्रियंका गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून पर तीन साल तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया और हाल ही में जल्दबाजी में अधिसूचना जारी की। उन्होंने मांग की कि पहले के स्वरूप में महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “शुक्रवार को लोकतंत्र की बड़ी जीत हुई है। केंद्र सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे में बदलाव की कोशिश की, जिसे विपक्ष ने मिलकर नाकाम कर दिया। यह संविधान और देश की जीत है।” प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर बिल पास करवाकर परिसीमन में मनमानी करना चाहती थी और जातिगत जनगणना से बचना चाहती थी। उनके अनुसार, यदि बिल पारित होता तो सरकार इसे अपनी उपलब्धि बताती और यदि नहीं होता तो विपक्ष को महिला विरोधी करार देती। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं से जुड़े कई गंभीर मामलों, उन्नाव, हाथरस, महिला खिलाड़ियों और मणिपुर की घटनाओं में सरकार का रवैया उदासीन रहा है। अब वही सरकार खुद को महिलाओं का हितैषी दिखाने की कोशिश कर रही है। प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि यह केवल महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि परिसीमन और राजनीतिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस तरह के प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर सकता था, जिसमें सरकार को बिना पारदर्शिता के फैसले लेने की छूट मिलती। उन्होंने यह भी कहा कि देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है, तो केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को चुनौती दी जा सकती है। यही कारण है कि सरकार इस दिन को ‘ब्लैक डे’ बता रही है, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र की जीत मानता है। कांग्रेस महासचिव ने अंत में कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और सरकार की “पीआर और मीडियाबाजी” को समझ रही हैं। महिला आरक्षण विधेयक संसद में पारित न होने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ने लोकतंत्र की रक्षा की है और परिसीमन से जुड़ी “साजिश” को विफल कर दिया है।

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