नई दिल्ली। देश में ई20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भविष्य की तकनीक यानी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर अधिक तेजी से बढ़ना चाहिए। सवाल यह है कि लंबे समय में इथेनॉल बेहतर विकल्प है या इलेक्ट्रिक वाहन।
ई20 से विदेशी मुद्रा बचत, लेकिन सीमाएं भी
सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल से तेल आयात कम होगा और किसानों को लाभ मिलेगा। हालांकि विशेषज्ञों का तर्क है कि इथेनॉल उत्पादन में भूमि, पानी, ऊर्जा और कृषि संसाधनों की बड़ी मात्रा खर्च होती है, जिससे इसकी वास्तविक आर्थिक बचत सीमित हो सकती है। पुराने वाहनों में ई20 के कारण माइलेज और अनुकूलता से जुड़ी दिक्कतों की शिकायतें भी सामने आई हैं।
इलेक्ट्रिक वाहन ज्यादा कुशल विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार सौर ऊर्जा से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन ऊर्जा उपयोग के मामले में इथेनॉल आधारित वाहनों की तुलना में कहीं अधिक कुशल हैं। भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन की लागत लगातार घट रही है और बैटरियां भी सस्ती हो रही हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य के लिए अधिक प्रभावी विकल्प बनते दिखाई दे रहे हैं।
ई20 फिलहाल जारी रहे, लेकिन भविष्य पर ध्यान जरूरी
विशेषज्ञों का सुझाव है कि ई20 नीति को अचानक समाप्त नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन इसे दीर्घकालिक समाधान मानने के बजाय अंतरिम व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि भारत को भोजन उत्पादन और कृषि भूमि के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना पर अधिक निवेश करना चाहिए।


