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झारखंड विधानसभा में नीरा यादव ने अबुआ आवास, डीएमएफटी फंड व वन भूमि मुद्दों पर सरकार को घेरा

रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन शुक्रवार को सदन में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, अबुआ आवास योजना, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड तथा वन भूमि से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए।

कोडरमा विधायक नीरा यादव ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में विकास कार्यों का प्रभाव धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन के अभाव में आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। बुनियादी ढांचा मजबूत किए बिना लोगों के जीवन स्तर में सुधार संभव नहीं है।

विधायक ने केंद्र से मिलने वाली राशि लंबित रहने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि 47,367 से अधिक उपयोगिता प्रमाण पत्र केंद्र सरकार को नहीं भेजे गए हैं, जिसके कारण केंद्रीय राशि लंबित है। उन्होंने राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर से विभागवार लंबित राशि का विवरण सदन में प्रस्तुत करने की मांग की। साथ ही सभी सांसदों और विधायकों की संयुक्त बैठक बुलाकर केंद्र से राज्य का अधिकार सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।

अबुआ आवास योजना पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 6.5 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब तक केवल 18,849 आवास ही पूर्ण हो सके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर गरीबों के मकान अधूरे पड़े हैं और जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं।

नीरा यादव ने पाकुड़ और दुमका जिले के जरमुंडी क्षेत्र में जियो टैगिंग में अनियमितता तथा लाभुकों को किस्त भुगतान में देरी का आरोप लगाया। साथ ही विधानसभा समिति को गलत जानकारी दिए जाने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि कोडरमा की एक सड़क का निर्माण दिसंबर 2025 में पूरा हो चुका था, जबकि 10 जनवरी 2026 को समिति को बताया गया कि कार्य शुरू ही नहीं हुआ है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जांच एवं कार्रवाई की मांग की गई।

मनरेगा के नाम को लेकर चल रही बहस पर उन्होंने कहा कि “राम” नाम से परहेज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी “हे राम” अंकित है।

डीएमएफटी फंड के उपयोग पर सवाल उठाते हुए विधायक ने आरोप लगाया कि खनन प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के बजाय अधिकतर राशि शहरी इलाकों में खर्च की जा रही है। उन्होंने कहा कि कोडरमा में इंजीनियरिंग कोचिंग के नाम पर एक निजी कंपनी को 1.88 करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। स्कूलों में थाली और ग्लास खरीद पर 78 लाख रुपये खर्च किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।

इसके अलावा चंदवारा, डोमचांच और सतगावां प्रखंड के जंगल क्षेत्रों में बाहरी लोगों को बसाए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के आधार एवं मतदाता पहचान पत्र बनाकर वन पट्टा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।

वहीं, सदन में विधायक राजेश कच्छप ने राज्य के 49 अंचलों में अंचल अधिकारी (सीओ) के रिक्त पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 72 अंचलों में प्रशिक्षु अधिकारियों से नियमित कार्य लिया जा रहा है, जबकि उन्हें प्रशिक्षण अवधि की सुविधाएं दी जा रही हैं, जो वित्तीय अनियमितता का विषय है।

इस पर जवाब देते हुए राज्य के राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि राज्य में अधिकारियों की कमी है। कुछ अधिकारियों को प्रोन्नति देकर पदस्थापित किया गया है। वहीं 46 अधिकारी एसडीएम रैंक में हैं, जिनका पदस्थापन अभी शेष है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशिक्षण पूर्ण होते ही एसडीएम रैंक के अधिकारियों का शीघ्र पदस्थापन किया

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