कई माता-पिता बच्चों को डांटने या सजा देने के बजाय प्यार से समझाने में विश्वास रखते हैं। इसके बावजूद कई बार बच्चे बार-बार जिद करते हैं, मनमानी करते हैं और अपनी आदतों में बदलाव नहीं लाते। पेरेंटिंग विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कुछ खास कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
नियम और सीमाएं तय न करना
पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा के अनुसार, बच्चों के व्यवहार में सुधार के लिए स्पष्ट नियम और सीमाएं तय करना जरूरी है। अगर बच्चा बार-बार नियम तोड़ता है और माता-पिता हर बार इसे नजरअंदाज कर देते हैं, तो बच्चे को लगता है कि ऐसा करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
धीरे-धीरे बच्चा माता-पिता के शांत स्वभाव को उनकी कमजोरी समझने लगता है और अपनी मनमानी बढ़ा सकता है।
बच्चे को लगता है माता-पिता मान जाएंगे
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बच्चे यह समझ लेते हैं कि माता-पिता ज्यादा देर तक नाराज नहीं रहेंगे और आखिर में उनकी बात मान लेंगे। ऐसे में वह अपनी जिद पर अड़ा रहता है और जिम्मेदारी लेने से बचने लगता है।
माता-पिता को बच्चों से प्यार के साथ-साथ दृढ़ता से बात करनी चाहिए, ताकि उन्हें सही और गलत का अंतर समझ आए।
गलत व्यवहार पर रोक नहीं लगाना
अगर बच्चा बार-बार रूखे तरीके से बात करता है, अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करता है या गलत व्यवहार करता है और उसे रोकने के लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाए जाते, तो उसकी आदतें और मजबूत हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को प्यार देने के साथ अनुशासन और सीमाओं की जानकारी देना भी जरूरी है। स्पष्ट नियमों और लगातार पालन से बच्चे बेहतर व्यवहार सीखते हैं।


