नई दिल्ली। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए सरकार पर आरोप लगाया कि उसने एलपीजी संकट को बिल्कुल कोविड महामारी की तरह लिया है। नीति शून्य, बड़ी घोषणाएं और पूरा बोझ गरीबों पर डाल दिया गया है। 500 से 800 रुपये की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए रसोई गैस अब पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटने वाले मजदूर के पास चूल्हा जलाने तक के पैसे नहीं हैं। नतीजा यह है कि मजदूर शहर छोड़कर गांव लौटने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो मजदूर वस्त्र मिलों और कारखानों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं। वस्त्र उद्योग पहले से ही गहन संकट में है और विनिर्माण दम तोड़ रहा है। यह संकट आया कहां से? इसका कारण वह कूटनीतिक चूक है जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती। नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया कि हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? यह सिर्फ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान देश में एलपीजी की हो रही किल्लत पर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि देश में इस समय रसोई गैस दिहाड़ी मजदूरों की पहुंच से बाहर हो गई है।
रसोई गैस दिहाड़ी मजदूरों की पहुंच से बाहर : राहुल
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