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पिलर में बोतल या ईंट रखने का इंजीनियरिंग कारण, घर की मजबूती से जुड़ा है राज

मकान निर्माण के दौरान कई बार कारीगर पिलर की ढलाई में प्लास्टिक की बोतल या ईंट रख देते हैं। इसे देखकर कई मकान मालिक लापरवाही या धोखाधड़ी समझ लेते हैं, जबकि सिविल इंजीनियरों के अनुसार यह पिलर को अधिक मजबूत बनाने की तकनीक का हिस्सा हो सकता है।

पिलर को टुकड़ों में ढालने की प्रक्रिया

आमतौर पर पिलर की ढलाई एक बार में पूरी नहीं होती, बल्कि अलग-अलग चरणों में की जाती है। पहले हिस्से के जमने के बाद उसके ऊपर अगला हिस्सा डाला जाता है। इसी जोड़ को मजबूत बनाने के लिए पिलर के बीच में प्लास्टिक की बोतल या ईंट रखकर बाद में निकाल ली जाती है, जिससे बीच में एक गहरा खांचा बन जाता है।

भूकंप के दौरान भी मिलती है मजबूती

जब अगले चरण की ढलाई होती है तो नया कंक्रीट उस खांचे में भरकर पुराने कंक्रीट से मजबूती से जुड़ जाता है। इससे दोनों हिस्सों के बीच इंटरलॉकिंग बनती है और पिलर की पकड़ मजबूत हो जाती है। इंजीनियरों का कहना है कि यह तकनीक पिलर की शीयर स्ट्रेंथ बढ़ाने में मदद करती है और भूकंप या अन्य झटकों के दौरान जोड़ों के कमजोर होने की संभावना कम करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक की बोतल आसानी से निकाली जा सकती है और कंक्रीट को नुकसान भी नहीं पहुंचाती, इसलिए कई निर्माण स्थलों पर इसका उपयोग किया जाता है। कुछ जगहों पर इसी उद्देश्य से ईंट या लकड़ी के ब्लॉक का भी इस्तेमाल किया जाता है।

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