यदि आपका बच्चा पढ़ाई से बचता हुआ दिखाई दे रहा है, तो यह जरूरी नहीं कि वह केवल बहाने बना रहा हो। पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा के अनुसार कई बार बच्चे के व्यवहार में ऐसे संकेत दिखाई देते हैं, जो बताते हैं कि वह पढ़ाई से भाग नहीं रहा, बल्कि पढ़ाई के डर, तनाव या दबाव से जूझ रहा है। ऐसे समय में डांटने के बजाय उसकी परेशानी को समझना अधिक जरूरी होता है।
ये तीन संकेत बताते हैं कि बच्चा डरा हुआ है
एक्सपर्ट के अनुसार पहला संकेत यह है कि बच्चा किताब खोलता है, लेकिन कुछ ही मिनटों में पानी पीने, फोन देखने या किसी अन्य बहाने से बार-बार उठ जाता है। दूसरा संकेत यह है कि पढ़ाई की बात होते ही वह गुस्सा या झुंझलाहट दिखाने लगता है। तीसरा संकेत तब होता है जब बच्चा बार-बार कहे कि ‘मेरा मन नहीं लग रहा’ या ‘मुझसे कुछ नहीं होगा’। ऐसे वाक्य केवल आलस नहीं, बल्कि पढ़ाई को लेकर बढ़ते मानसिक दबाव का संकेत भी हो सकते हैं।
डांटने से पहले समझें बच्चे की परेशानी
पुष्पा शर्मा का कहना है कि माता-पिता को ऐसे समय में सलाह देने या गुस्सा करने के बजाय यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि बच्चा किस बात से डर रहा है। उससे शांत माहौल में पूछें कि पढ़ाई में उसे सबसे ज्यादा कठिनाई किस बात की लग रही है। कई बार बच्चे को समाधान से पहले ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो बिना जज किए उसकी बात सुने।
जरूरत पड़े तो शिक्षक या काउंसलर से करें बात
एक्सपर्ट का कहना है कि यह मानकर न चलें कि बच्चा केवल बहाने बना रहा है। उससे बात तभी करें जब आप और बच्चा दोनों शांत हों। यदि समस्या समझ में न आए, तो उसके शिक्षक या काउंसलर से सलाह लें। ऐसे समय में बच्चे को डांट नहीं, बल्कि प्यार, समझ और सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।


