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विपक्ष ने डिप्टी स्पीकर का पद नहीं दिए जाने पर किया स्पीकर के चुनाव का प्रतिकात्मक विरोध

नई दिल्ली : 18वीं लोकसभा में स्पीकर का निर्विरोध चुनाव नहीं हो सका। विपक्ष इसका सबसे बड़ा कारण डिप्टी स्पीकर की शर्त को सत्ता पक्ष द्वारा मंजूर नहीं किया जाना बता रहा है। विपक्षी सांसद यह मानकर चल रहे थे कि सत्ता पक्ष के पास अच्छी खासी संख्या सदन में मौजूद है, ऐसे में स्पीकर का पद पर सत्ता पक्ष की ओर से ओम बिरला का स्पीकर पद पर चुना जाना तय है। हालांकि, विपक्ष के सांसदों ने सदन और सदन के बाहर ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष पद पर चुने बधाई भी दी, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनका यह विरोध प्रतिकात्मक था।

संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि संविधान के अनुसार हम स्पीकर के लिए विपक्षी नेता को नामित कर सकते हैं। इसलिए हमने संवैधानिक पद के लिए अपने उम्मीदवार को नामांकित किया। उन्होंने कहा कि हम जानते थे कि हमारे पास संख्या बल नहीं है, लेकिन उन्हें यह याद दिलाना जरूरी था कि वे जो चाहें, हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे।

मीडिया से बातचीत में कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि वे ओम बिरला को स्पीकर पद पर निर्वाचित होने के लिए बधाई देना चाहते हैं। उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा विरोध प्रतीकात्मक और लोकतांत्रिक था, क्योंकि वे (एनडीए) परंपरा को तोड़कर हमें उपाध्यक्ष का पद नहीं दे रहे थे।

राज्य सभा सदस्य महुआ माजी ने ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई देते हुए कहा कि आईएनडीआईए ने मांग की थी कि डिप्टी स्पीकर विपक्ष का होना चाहिए। इसलिए आठ बार के सांसद के सुरेश का नाम प्रस्तावित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि स्पीकर पद के लिए चुनाव नहीं होता, अगर सरकार डिप्टी स्पीकर पद विपक्ष को देने पर सहमत होती।

पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने कहा कि ”विधानसभा में भी, नियम यह निर्धारित करता है कि यदि कोई मतविभाजन (मतदान) की मांग करता है, तो मतविभाजन (मतदान) होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अध्यक्ष विभाजन की अनुमति दे भी सकता है और विभाजन की अनुमति नहीं भी दे सकता है। चूंकि बहुमत उस उम्मीदवार के पक्ष में प्रतीत होता है जिसे भाजपा ने नामांकित किया है, उसे इस मामले में विभाजन (मतदान) की अनुमति देनी चाहिए थी; उन्होंने अनुमति नहीं दी।

लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “मैं आपको औपचारिक रूप से बता रहा हूं, हमने वोटों के विभाजन की मांग नहीं की थी, क्योंकि हमें यह उचित लगा कि पहले दिन आम सहमति बने। पहले दिन आम सहमति का माहौल था। यह हमारी ओर से एक रचनात्मक कदम था। हम (वोटों के) विभाजन की मांग कर सकते थे।”

हालांकि, विपक्ष को अभी भी उम्मीद है इसके बावजूद डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष के हिस्से में जाएगा। हमने स्पीकर के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा कर निर्विरोध चुनाव की परंपरा को विराम दे दिया। सांसद मीसा भारती ने कहा कि पहले कहा गया था कि डिप्टी स्पीकर हमें दिया जाएगा, लेकिन हम अभी भी राजनाथ सिंह के फोन का इंतजार कर रहे हैं।

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