बच्चों पर अंकों का दबाव भारी: 79% लाने वाली बच्ची ने छोड़ा स्कूल जाना, डॉक्टर ने दी बड़ी सीख

मुंबई। अच्छे अंक लाने की होड़ और तुलना की मानसिकता बच्चों पर किस तरह मानसिक दबाव बना रही है, इसका एक मार्मिक उदाहरण सामने आया है। एक नौ वर्षीय बच्ची ने डॉक्टर से कहा कि वह स्कूल नहीं जाना चाहती, क्योंकि उसके दोस्त उससे बात नहीं करते और घर पर भी कम अंक आने को लेकर उसे डांट सुननी पड़ती है। बाल रोग विशेषज्ञ ने इस घटना को सभी अभिभावकों के लिए बड़ी सीख बताया है।

79 प्रतिशत अंक के बाद बढ़ा मानसिक दबाव

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष यादव ने एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि नौ साल की एक बच्ची ने परीक्षा में 79 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, लेकिन वह स्कूल जाने से डरने लगी। बच्ची ने बताया कि उसके दो दोस्तों के अंक उससे अधिक आए हैं, इसलिए वे अब उससे बात नहीं करते। घर लौटने पर उसकी मां ने भी उससे पूछा कि उससे ज्यादा अंक क्यों नहीं आए।

डॉक्टर के अनुसार, इस दोहरे दबाव का असर बच्ची के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा। उसे स्कूल जाने के नाम पर सिरदर्द, पेटदर्द, घबराहट और तनाव जैसी समस्याएं होने लगीं।

बच्चों के प्रयास की सराहना जरूरी

डॉ. यादव ने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के केवल परिणाम नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और प्रयास की भी सराहना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 79 प्रतिशत अंक किसी भी दृष्टि से कम नहीं हैं, लेकिन यदि बच्चे की मेहनत की बजाय केवल अंकों पर ध्यान दिया जाएगा तो उसका आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि लगातार तुलना और बेहतर प्रदर्शन का दबाव बच्चों के मन पर गहरा असर डालता है, जिससे वे पढ़ाई और स्कूल दोनों से दूरी बनाने लगते हैं।

अधिक दबाव भविष्य में बन सकता है गंभीर समस्या

विशेषज्ञ के अनुसार, यदि शुरुआती उम्र में बच्चों पर लगातार प्रदर्शन का दबाव बनाया जाए तो आगे चलकर 11वीं-12वीं जैसी महत्वपूर्ण कक्षाओं में उनका मानसिक तनाव और बढ़ सकता है। कई बार यही दबाव बच्चों को गलत और गंभीर कदम उठाने तक मजबूर कर देता है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के अंक की तुलना करने के बजाय उनके प्रयास, सीखने की प्रक्रिया और आत्मविश्वास को महत्व दें। इससे बच्चे मानसिक रूप से मजबूत बनेंगे और पढ़ाई के प्रति उनका उत्साह भी बना रहेगा।

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