नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित, तेज और व्यापक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। National Payments Corporation of India (एनपीसीआई) अब Artificial Intelligence की मदद से Unified Payments Interface नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी में है। एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप असबे ने रोजाना एक अरब यूपीआई लेनदेन और 50 करोड़ नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ने का लक्ष्य तय किया है।
एआई से बढ़ेगी सुरक्षा और आसान होगी सेवाएं
दिलीप असबे के अनुसार, एआई का उपयोग ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने, फर्जी खातों की पहचान करने और डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाने में किया जाएगा। इसके अलावा, एआई आधारित तकनीक से ग्राहकों और व्यापारियों को ऋण संबंधी सेवाएं भी अधिक सरलता से उपलब्ध कराई जा सकेंगी। भारतीय भाषाओं और वॉयस आधारित सुविधाओं के जरिए नए उपयोगकर्ताओं को यूपीआई से जोड़ने की भी तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ रहे डिजिटल लेनदेन को देखते हुए मजबूत नियामकीय व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि एआई आधारित निर्देशों और भुगतान प्रक्रियाओं का पारदर्शी रिकॉर्ड रखा जा सके। साथ ही, फिनटेक कंपनियों को भारतीय भाषाओं पर आधारित छोटे लैंग्वेज मॉडल विकसित करने का अवसर भी मिलेगा।
भीम ऐप को मिलेगा नया बढ़ावा
एनपीसीआई अब अपने आधिकारिक BHIM ऐप को अधिक सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। वर्तमान में PhonePe और Google के भुगतान प्लेटफॉर्म का यूपीआई बाजार में लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा है।
इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए 31 दिसंबर 2026 से किसी भी यूपीआई ऐप की बाजार हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक सीमित करने की प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने की संभावना है। एनपीसीआई का मानना है कि इससे डिजिटल भुगतान क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित तथा बेहतर विकल्प मिल सकेंगे।
डिजिटल भुगतान का अगला चरण
एनपीसीआई का मानना है कि एआई आधारित तकनीक, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और बहुभाषी सुविधाओं के जरिए यूपीआई को देश के दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ेगा और भारत के डिजिटल अर्थतंत्र को नई मजबूती मिलेगी।
