उपराष्ट्रपति बोले: ‘नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी समाज की सच्ची सेवा नहीं कर सकता’

नई दिल्ली। देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को विज्ञान भवन में भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) के 78वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने सीए समुदाय को “भरोसे का दूत” बताते हुए कहा कि विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा में उनका विशेष महत्व है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर कड़ा जोर दिया कि नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी सही मायने में समाज के लिए लाभकारी नहीं हो सकता, इसलिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक सुशासन को इस पेशे के केंद्र में रहना चाहिए।

परीक्षा मानकों से समझौता न करने की सलाह और अर्थव्यवस्था की रफ्तार

उपराष्ट्रपति ने कठोर परीक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए आईसीएआई की सराहना की और संस्थान से इन मानकों को कभी कमज़ोर न करने का आग्रह करते हुए कहा कि आप सीधे तौर पर देश की वित्तीय व्यवस्था की रक्षा कर रहे हैं। पिछले एक दशक में भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश बहुत कम समय में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है और अब जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल धर्मसम्मत साधनों से अर्जित धन ही स्थायी सुख प्रदान करता है।

ओडीओपी को सहयोग देने का आह्वान और दो नए पोर्टल लॉन्च

ऐतिहासिक राष्ट्रीय सुधारों जैसे जीएसटी, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) में सीए की भूमिका को सराहते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें स्थानीय उद्यमों को सहयोग देने का सुझाव दिया। उन्होंने आईसीएआई के जिला-स्तरीय संघों से अपील की कि वे ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) पहल के तहत चिन्हित उत्पादों का व्यावहारिक ज्ञान विकसित करें, ताकि उत्पादकों को गुणवत्ता से समझौता किए बिना लागत कम करने का मार्गदर्शन मिल सके। इस विशेष अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आईसीएआई के पीयर रिव्यू बोर्ड (PRB) वेब पोर्टल और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए ‘आईसीएआई जन उत्सव पोर्टल’ का भी शुभारंभ किया।

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