हैदराबाद हाउस में ऐसा क्या हुआ कि 100 खरब येन का रोडमैप और 1000 प्लांट का फैसला भी लगने लगा सिर्फ शुरुआत… असली कहानी अभी बाकी है!

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने गुरुवार काे यहां हैदराबाद हाउस में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में परस्पर संबंधाें काे भाई बहन के रिश्ते के काेमल धागे से बांधा ताे पूरा वातावरण राेमांचित हाे गया। दाेनाें देशाें के बीच करीब दाे घंटे तक चली बैठक के बाद परस्पर सहयाेग के चार ज्ञापनों पर हस्ताक्षर एवं आदान प्रदान किया गया। इनमें भूगर्भीय खनिजों की खोज, फार्मास्युटिकल्स एवं मेडिकल उपकरण, बैटरी निर्माण और बायाेगैस एवं जैविक खाद के संयंत्राें की स्थापना में सहयाेग के दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देशों ने आज एआई के क्षेत्र में एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया है और साथ ही रक्षा क्षेत्र में संयुक्त विकास परियोजना पर सहमति जताई। इससे पहले जापानी प्रधानमंत्री का आज सुबह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी समकक्ष ताकाइची के बीच वार्ता हुई। बाद में संयुक्त वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री को “मेरी छोटी बहन प्रधानमंत्री ताकाइची जी” कह कर पुकारा तो प्रधानमंत्री ताकाइची भावुक हो गईं। उन्होंने भी अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री को “मेरे बड़े भाई प्रधानमंत्री मोदी” कह कर पुकारा और कहा, “आपने मुझे एक प्यारी छोटी बहन कहा, लेकिन बड़ी बैठक से पहले हुई छोटी बैठक में हमने पक्का किया कि हम एक ही सोच रखते हैं और इस रिश्ते को भाई-बहन की तरह ही आगे बढ़ाएंगे।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगले 10 सालों में भारत जापान से 100 खरब येन (जापानी मुद्रा) के निवेश और देश में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। भारत और जापान की अर्थव्यवस्था को पूरक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएं पूरक हैं। सांस्कृतिक मूल्यों से लेकर आधुनिक टेक्नोलॉजी तक, हमारी सोच और दृष्टिकोण में भी समानता है। और सबसे बढ़कर, हमारे संबंधों की नींव अटूट आपसी विश्वास पर टिकी है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी यह विशेष साझेदारी, सशक्त और समृद्ध जापान के आपके विजन, विकसित भारत के हमारे संकल्प और विश्व की प्रगति को, नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। एक सशक्त और समृद्ध जापान का आपका विजन, विकसित भारत का हमारा संकल्प, और पूरे विश्व की प्रगति को मिलकर साकार करें। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि वैश्विक उथल-पुथल के माहौल में आपसी विश्वास दोनों देशों के लिए बड़ी रणनीतिक पूंजी है। प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता में बनी सहमति और निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि आज के अनिश्चितता भरे युग में, भारत और जापान दोनों आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा का महत्व अच्छी तरह समझते हैं। इसी दिशा में आज हमने आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त रोडमैप तैयार किया है। इसके माध्यम से हम सेमीकंडक्टर, क्वांटम, और उन्नत सामग्री जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की सातत्यता को मजबूत करेंगे। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी आज हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। भारत-जापान बायो-गैस पहल के माध्यम से हम भारत में एक हजार बायो-गैस और जैविक खाद संयंत्र लगाने में सहायता मिलेगी। इससे हमारी गोवर्धन पहल और मजबूत होगी। इससे भारत के गांवों में स्थिरता, समृद्धि, और ग्रामीण आजीविका, को नई शक्ति मिलेगी। तेल के झटके जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आज हमने ऊर्जा रेजिलिएंस पर भी एक महत्वपूर्ण पहल की है। साथ ही, बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा में हमारा सहयोग, विश्व के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा। भारत और जापान ने आज आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त रोड मैप को मंजूरी दी जिसके माध्यम से दोनों देश सेमीकंडक्टर, क्वांटम और एडवांस्ड पदार्थ जैसे रणनीतिक क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को लचीला और मजबूत बनाने के लिए 100 खरब येन के भारी भरकम निवेश के साथ काम करेंगे। इसके अलावा जापान के साथ मिल कर भारत में एक हजार बाॅयाेगैस संयंत्र स्थापित किये जाने पर भी सहमति बनी।

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