कोलकाता। वाम मोर्चा सरकार से लेकर तृणमूल कांग्रेस शासन तक 1977 से 2026 के बीच रेड रोड पर वर्ष में दो बार ईद-उल-फितर और बकरीद की नमाज आयोजित होती रही थी। तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी हर वर्ष रेड रोड पर आयोजित नमाज कार्यक्रम में शामिल होती थीं। पिछले कई वर्षों से खुले रास्तों पर नमाज आयोजन को लेकर यातायात अव्यवस्था और जाम की शिकायतें सामने आती रही थीं। इस बार कोलकाता में कहीं भी सड़कों पर बकरीद की नमाज आयोजित नहीं की गई। प्रशासन ने सभी बड़े आयोजनों को निर्धारित मैदानों और परिसरों तक सीमित रखा। बकरीद के अवसर पर कोलकाता पुलिस ने पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। ब्रिगेड परेड मैदान और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। मस्जिदों के आसपास भी सुरक्षा बढ़ाई गई थी। निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के बाद घोषणा की थी कि राज्य में सार्वजनिक सड़कों पर ऐसे धार्मिक आयोजनों की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिनसे आम लोगों को यातायात समस्या का सामना करना पड़े। गुरुवार को कोलकाता में बकरीद की नमाज के आयोजन में इस नीति का असर स्पष्ट दिखाई दिया। उल्लेखनीय है कि, पिछले वर्ष भारतीय सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय, जिसके अधीन रेड रोड का प्रशासनिक नियंत्रण आता है, ने खिलाफत समिति से सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वैकल्पिक स्थान तलाशने को कहा था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सेना अधिकारियों से अनुमति दिलाने की कोशिश की बात कही थी। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इस बार बकरीद की नमाज ब्रिगेड परेड मैदान में आयोजित की गई। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद कोलकाता में इस बार बकरीद की नमाज को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला। कई वर्षों बाद पहली बार ईद-उल-अजहा की सामूहिक नमाज रेड रोड पर आयोजित नहीं हुई। इसके स्थान पर गुरुवार को नमाज का आयोजन ब्रिगेड परेड ग्राउंड में किया गया।
