बेंगलुरु। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंपने के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “राज्यपाल शहर में नहीं हैं, उनके रात तक लौटने की जानकारी कार्यालय से मिली। इसलिए अपना इस्तीफा पत्र उनके सचिव को सौंप दिया है। मुझे पूरा विश्वास है कि राज्यपाल के लौटने के बाद मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा।” सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि उन्होंने आलाकमान का निर्देश मिलते ही इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा, “मैं पहले से ही कहता आ रहा था कि आलाकमान जब भी निर्देश देगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा। उसी के अनुसार निर्देश मिलने के बाद इस्तीफा सौंप दिया।” अपने राजनीतिक जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैं गांव से आया हुआ व्यक्ति हूं। कभी नहीं सोचा था कि विधायक बनूंगा या मुख्यमंत्री बनूंगा। राजनीति में मेरा आना संयोग था। मेरे परिवार में कोई भी राजनीति में नहीं था।” उन्होंने अपने वैचारिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं बुद्ध, बसवन्ना, डॉ. बी.आर. आंबेडकर और महात्मा गांधी के आदर्शों में विश्वास रखने वाला व्यक्ति हूं। संविधान ही हमारा धर्म है, मैं ऐसा मानता हूं।” कन्नड़ अभिनेता दिवंगत डॉ. राजकुमार का जिक्र करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, “राजकुमार अपने प्रशंसकों को भगवान कहते थे। मैं एक राजनेता हूं, मेरे लिए मतदाता ही भगवान हैं। कर्नाटक के 7 करोड़ लोगों की सेवा करने का अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।” इस दौरान उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे दो बार मुख्यमंत्री बनने और दो बार विपक्ष का नेता बनने का अवसर मिला। इसके लिए मैं कांग्रेस आलाकमान का आभारी हूं।” उन्होंने कहा कि साल 2006 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों ने उन्हें भरपूर प्यार और सहयोग दिया। उन्होंने कहा, “साल 2013 से 2018 तक मैं पहली बार मुख्यमंत्री रहा। इसके बाद साल 2023 से अब तक फिर मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिला। मेरे साथ काम करने वाले सभी लोगों का मैं आभारी हूं।” कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से गुरुवार को इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल शहर में मौजूद नहीं थे इसलिए उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र राज्यपाल के सचिव को सौंप दिया।
