नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि के सम्मान को मानव अस्तित्व का मूल आधार बताते हुए नागरिकों से इनके प्रति कृतज्ञता और सेवाभाव अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के संरक्षण की भावना के साथ सभी लोग स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।
प्रधानमंत्री मोदी ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है। आइए, हम इनके प्रति पूरी कृतज्ञता और सेवाभाव के साथ एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।”
वैदिक सुभाषित के माध्यम से दिया संदेश
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक वैदिक सुभाषित भी साझा किया—
“शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु।
शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः॥”
इस सुभाषित का अर्थ है कि आकाश और पृथ्वी हमारे लिए कल्याणकारी हों, अंतरिक्ष सुखद और मंगलमय हो, औषधियां और वनस्पतियां हमारा कल्याण करें तथा प्रकृति के सभी तत्व और शक्तियां हमारे लिए शुभ एवं हितकारी सिद्ध हों।


