भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में बुधवार से चार दिवसीय ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का शुभारंभ होगा। आठ अगस्त तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में किया जाएगा, जिसमें ब्रिक्स सदस्य और भागीदार 10 देशों के संस्कृति मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और 100 से अधिक विदेशी प्रतिनिधि भाग लेंगे।
सम्मेलन में सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण, संग्रहालय, रचनात्मक उद्योग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच जुड़ाव जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
घोषणापत्र पर बनेगी अंतिम सहमति
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि 5 और 6 अगस्त को अधिकारी स्तर पर नीतिगत प्रारूपों और विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। 7 और 8 अगस्त को संस्कृति मंत्रियों और उपमंत्रियों के स्तर पर विचार-विमर्श कर अंतिम सहमति बनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि सदस्य देशों के साथ पहले वर्चुअल बैठक और उसके बाद वाराणसी में आयोजित दूसरी बैठक में मसौदे पर व्यापक चर्चा हो चुकी है। भोपाल में आयोजित तीसरी और अंतिम बैठक में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के घोषणापत्र पर सभी देशों की औपचारिक मुहर लगेगी।
सांस्कृतिक संध्या और महोत्सव होंगे आकर्षण का केंद्र
आज शाम प्रतिनिधि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का दौरा करेंगे, जहां मृदा शिल्प प्रदर्शनी, पारंपरिक स्वागत, स्वदेशी शिल्प और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद ट्राइबल हैबिटेट में ‘नागा हाउस’ और ‘हिमालयी गांव’ का भ्रमण कराया जाएगा। शाम को सांस्कृतिक संध्या में कथक, पारंपरिक सामुदायिक नृत्य और भारत की विविध जनजातीय एवं पारंपरिक पोशाकों पर आधारित विशेष प्रस्तुति होगी।
6 अगस्त को तीसरी ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक में संस्कृति मंत्रियों के घोषणापत्र के मसौदे और सांस्कृतिक सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी। शाम को रवींद्र भवन में ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित होगा, जिसमें सदस्य और भागीदार देशों के कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। यह कार्यक्रम आम जनता के लिए भी खुला रहेगा।
7 अगस्त की शाम रवींद्र भवन में ‘ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन होगा। इसकी शुरुआत “सर्वे भवन्तु सुखिनः” से होगी और इसके बाद हिंदुस्तानी तथा कर्नाटक शास्त्रीय परंपराओं पर आधारित ‘कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक’ प्रस्तुत किया जाएगा। महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग – पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड’ होगा, जिसमें ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, बेलारूस, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की संगीतमय परंपराओं का समावेश रहेगा।
‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ से मिलेगा सिंहस्थ 2028 का निमंत्रण
महोत्सव की अंतिम और विशेष प्रस्तुति ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश – एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा’ होगी। विख्यात कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य संरचना भीमबेटका, सांची, खजुराहो, चित्रकूट, उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वरी-चंदेरी वस्त्र परंपरा और मध्य प्रदेश के समृद्ध जनजातीय लोकनृत्यों को मंच पर जीवंत करेगी। इस प्रस्तुति के माध्यम से अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा।
सांची और भीमबेटका का भी करेंगे भ्रमण
मंत्रीस्तरीय बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची का दौरा करेगा। प्रतिनिधि बुद्ध जंबूदीप, सांची स्तूप, चेतियागिरी मंदिर, योग एवं ध्यान सत्र तथा 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो का अनुभव करेंगे। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका शैलाश्रय का वैकल्पिक भ्रमण भी आयोजित किया गया है।
इसके अलावा 5 और 8 अगस्त को हेरिटेज वॉक, 7 अगस्त को बर्ड वाचिंग, 6 और 7 अगस्त को भोपाल की झील में शिकारा राइड और 7 अगस्त को मध्य प्रदेश के हस्तशिल्प व स्थानीय कलाकृतियों की विशेष खरीदारी की व्यवस्था भी की गई है।
आगंतुक प्रतिनिधियों को मध्य प्रदेश की समृद्ध पाक परंपरा का स्वाद भी चखाया जाएगा। इसमें मालवी, बुंदेली और निमाड़ी व्यंजनों के साथ दाल बाफला, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा तथा कोदो और कुटकी जैसे मिलेट आधारित पारंपरिक व्यंजन परोसे जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के लिए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की भी विशेष व्यवस्था की गई है।


