भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी नेतृत्व ने दतिया जिला कार्यकारिणी के साथ सभी मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों की इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दतिया उपचुनाव में हार की समीक्षा के लिए गठित विशेष समिति की अनुशंसा पर यह कार्रवाई की। मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और वरिष्ठ नेताओं की उच्च स्तरीय बैठक हुई थी, जिसके बाद दो सदस्यीय समीक्षा समिति का गठन किया गया।
छह घंटे में भंग हुई पूरी संगठनात्मक इकाई
समिति गठन के करीब छह घंटे बाद ही भाजपा संगठन ने दतिया जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित जिला पदाधिकारियों, जिला कार्य समिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों की सभी वर्तमान संगठनात्मक इकाइयों को पदमुक्त कर दिया। समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट से केंद्रीय नेतृत्व को भी अवगत कराया गया, जिसके बाद देर रात यह कार्रवाई की गई।
गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। टिकट बदलने के बाद पार्टी के भीतर तीखा विरोध देखने को मिला था। कई कार्यकर्ताओं पर मामले दर्ज हुए और बाद में नरोत्तम मिश्रा को स्वयं समर्थकों से तिवारी के समर्थन की अपील करनी पड़ी थी।
भीतरघात के आरोपों ने बढ़ाई हलचल
मुख्यमंत्री आवास पर हुई समीक्षा बैठक में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी कथित भीतरघात से जुड़े ऑडियो रिकॉर्डिंग और वाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट लेकर पहुंचे थे। उन्होंने चुनाव के दौरान संगठन के कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर सहयोग न करने का आरोप लगाया। बैठक में हार के कारणों, संगठन की भूमिका और भीतरघात की शिकायतों पर विस्तृत चर्चा के बाद समीक्षा समिति बनाने का निर्णय लिया गया।
समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया है। दोनों नेता दतिया में पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर यह पता लगाएंगे कि किन कारणों से पार्टी उपचुनाव में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी।
नरोत्तम समर्थकों की टीम पर गिरी गाज
पार्टी सूत्रों के अनुसार दतिया की जिला कार्यकारिणी को पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा समर्थक टीम माना जाता था। जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित कई पदाधिकारी उनके करीबी माने जाते हैं। टिकट बदलने के बाद यही टीम सामूहिक इस्तीफा देने पर आमादा हो गई थी। उस समय संगठन ने डैमेज कंट्रोल की रणनीति अपनाते हुए इस्तीफे स्वीकार नहीं किए थे, लेकिन उपचुनाव हारने के बाद पूरी संगठनात्मक टीम को हटा दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि चुनाव के दौरान पार्टी कार्यालय की अधिकांश गतिविधियां भी प्रभावित रहीं और संगठनात्मक स्तर पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई दी। प्रदेश नेतृत्व का मानना है कि भीतरघात ने चुनाव परिणाम को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद जहां कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है, वहीं भाजपा के स्थानीय संगठन में सन्नाटा पसरा हुआ है। पार्टी अब संगठनात्मक पुनर्गठन और हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा में जुट गई है।


