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झारखंड को वन संरक्षण के एवज में केंद्र दे विशेष फंड : चेंबर अध्यक्ष

रांची। नीति आयोग के सहयोग से ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी की ओर से सतत उद्यम विकास के माध्यम से ग्रामीण एवं आदिवासी आजीविका सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन बुधवार को किया गया।

कार्यशाला में फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा शामिल हुए। कार्यशाला में नीति-निर्माता, वरिष्ठ अधिकारी, वित्तीय संस्थान और विभिन्न भागीदार संस्थाओं के साथ व्यापक चर्चा हुई।

कार्यशाला का उद्देश्य आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम आधारित विकास को गति देना एवं कौशल, वित्त तथा बाजार तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों का समाधान तलाशना था।

इस अवसर पर चेंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि झारखंड में ग्रामीण और आदिवासी आजीविका को सिर्फ गुजर-बसर की सोच से निकलकर सतत उद्यम की दिशा में ले जाना समय की मांग है।

ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने की जरूरत

उन्होंने बताया कि राज्य की लगभग 26 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति से आती है और करीब 78 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं, ऐसे में विकास की रणनीति का आधार समुदाय की भागीदारी और स्थानीय संसाधनों का उपयोग होना चाहिए। चेंबर अध्यक्ष ने झारखंड में महुआ बोर्ड की स्थापना की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड देश के लिए जंगल और पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा रहा है। वनों की रक्षा के कारण राज्य अपने कई संसाधनों का उपयोग नहीं कर पा रहा है। इसलिए इसके एवज में केंद्र सरकार की ओर से झारखंड को विशेष केंद्रीय फंड उपलब्ध कराया जाना न्यायसंगत होगा।

उन्होंने ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, स्वयं सहायता समूहों को एफपीओ और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में परिवर्तित करने, माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस के मूल्य संवर्धन, ब्लॉक स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना एवं जामकोफेड जैसे मॉडलों के विस्तार पर बल दिया। साथ ही वाड़ी मॉडल, जल संरक्षण, जलवायु-स्मार्ट कृषि, डिजिटल मार्केट लिंकज, ई-मार्केटप्लेस से जोड़ने, ब्रांडिंग, कौशल विकास, स्टार्टअप हब, गैर-कृषि रोजगार और कोयला-आधारित अर्थव्यवस्था से जस्ट ट्रांजिशन की दिशा में ग्रामीण उद्यमों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

चेंबर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राज्य में उद्यम, निवेश और रोजगार सृजन के लिए वह सरकार और नीति आयोग के साथ निरंतर सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे प्रयासों से झारखण्ड को एक मजबूत ग्रामीण-आदिवासी उद्यम आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया जा सकता है।

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