उज्जैन। प्रसिद्ध पार्श्वगायक बी प्राक रविवार सुबह उज्जैन पहुंचे और भगवान महाकालेश्वर की प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उप प्रशासक एस.एन. सोनी ने उनका स्वागत और सम्मान किया।
बाबा महाकाल के दर्शन के बाद बी प्राक ने मंदिर और जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि सावन के पवित्र महीने में बाबा महाकाल के दरबार में उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि उनके प्रसिद्ध शिव भजन ‘महाकाल’ को बाबा की कृपा से दुनियाभर में करोड़ों लोगों का प्यार मिला है।
जल्द आएगा ‘महाकाल-2’, नया शिव भजन भी होगा जारी
बी प्राक ने अपने चर्चित भजन ‘महाकाल महाकाल है प्यारे’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस गीत को करोड़ों बार देखा गया और लोगों से अपार प्यार मिला। उन्होंने बताया कि शिवजी पर आधारित उनका नया भजन भी जल्द जारी होने वाला है। साथ ही वह ‘महाकाल-2’ की तैयारी में जुट गए हैं, जिसे जल्द दर्शकों के बीच लाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इंदौर में कार्यक्रमों के बाद पहली बार उन्हें बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में प्रस्तुति देने का अवसर मिला है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन का विशेष आभार जताया।
शाम को ‘शिवतत्व-श्रावण कला उत्सव’ में देंगे प्रस्तुति
श्रावण मास के अवसर पर रविवार शाम 7 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित शक्तिपथ, त्रिवेणी संग्रहालय के सामने ‘शिवतत्व-श्रावण कला उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में होने वाले इस सांगीतिक कार्यक्रम में बी प्राक और उनकी मुंबई की टीम शिव भजनों की विशेष प्रस्तुति देगी।
कार्यक्रम में निवाड़ी के कलाकार पवन तिवारी और उनका दल भी सांस्कृतिक एवं भक्तिमय प्रस्तुतियां देगा।
भस्म आरती में हुआ बाबा महाकाल का विशेष शृंगार
रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक हुआ और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया।
पूजन के दौरान भगवान महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू के साथ भांग अर्पित कर शृंगार किया गया। हरि ओम का जल चढ़ाने के बाद कपूर आरती हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर विधि-विधान से भस्म अर्पित की गई।
भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। मोगरे और गुलाब के सुगंधित फूलों से बनी मालाएं भी अर्पित की गईं। भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।


