नई दिल्ली। महिला आरक्षण को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सवालों का जवाब दिया है। रिजिजू ने कहा कि महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीट आरक्षित करने का प्रावधान संविधान के 106वें संशोधन अधिनियम-2023 यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में किया जा चुका है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
2029 में लागू करने के लिए जल्द शुरू करनी होगी प्रक्रिया
रिजिजू ने शनिवार को एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि महिला आरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधान जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर प्रभावी होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा जनगणना प्रक्रिया जारी है और उसके आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया जाना है।
उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना के कारण वर्ष 2026 के बाद प्रकाशित होने वाले जनगणना आंकड़ों को अंतिम रूप देने में समय लग सकता है। इससे महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो सकती है और संभव है कि यह 2034 के आम चुनाव से पहले लागू न हो पाए।
रिजिजू के मुताबिक, यदि महिला आरक्षण को 2029 के आम चुनाव से लागू करना है तो उपलब्ध नवीनतम प्रकाशित जनगणना आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करनी होगी।
परिसीमन विधेयक का भी दिया हवाला
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने की पद्धति परिसीमन विधेयक-2026 में प्रस्तावित की गई थी। इसे संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक के साथ लोकसभा में पेश किया गया था। हालांकि, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पारित नहीं हो सका।
इससे पहले राहुल गांधी ने एक्स पर रिजिजू को संबोधित करते हुए कहा था कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और कांग्रेस ने उसका पूर्ण समर्थन किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन साल बाद भी इसे लागू क्यों नहीं किया गया और इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। राहुल ने कहा था कि 2023 के कानून को बिना किसी शर्त के लागू किया जाना चाहिए।
रिजिजू ने इससे पहले कांग्रेस के एक्स हैंडल पर साझा राहुल गांधी के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह कांग्रेस की ओर से सकारात्मक संदेश प्रतीत होता है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।
राहुल गांधी ने वीडियो में कहा था कि भारत की महिलाओं की ऊर्जा को दबाकर रखा गया है और उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक उसकी महिलाएं अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे नहीं बढ़तीं।


