नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए ज्ञान, साधना और निरंतर प्रयास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लगातार कोशिश और लगन से प्रतिभा निखरती है और आज देश के युवा इन्हीं गुणों के बल पर दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
संस्कृत श्लोक के माध्यम से दिया संदेश
प्रधानमंत्री ने भगवद्गीता का श्लोक साझा किया— “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति॥”। इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ भी नहीं है। कर्मयोग और साधना के द्वारा जिसका अंतःकरण शुद्ध हो जाता है, वह समय आने पर उस परम ज्ञान को अपने भीतर अनुभव करता है।
युवाओं को प्रेरित करने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्म-साधना, अनुशासन और निरंतर प्रयास व्यक्ति की प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने युवाओं से ज्ञान और परिश्रम को जीवन का आधार बनाने का संदेश देते हुए कहा कि आज के युवा अपने समर्पण और मेहनत से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं।


