देहरादून। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भविष्य के युद्धों में तकनीक, संयुक्त सैन्य क्षमता और बहु-आयामी रणनीति निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप सशस्त्र बलों को नई तकनीकों को अपनाते हुए लगातार खुद को तैयार रखना होगा।
रविवार को सैनिक संस्थान, गढ़ी कैंट में ऑल इंडिया गोरखा एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के सम्मान समारोह में जनरल चौहान ने कहा कि 47 वर्ष की सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया और सीडीएस के रूप में उनका कार्यकाल भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
युद्ध की तैयारी ही सबसे बड़ी ताकत
जनरल चौहान ने कहा कि सैनिक केवल युद्ध नहीं लड़ता, बल्कि अधिकांश समय उसकी तैयारी, रणनीति निर्माण और समन्वय में बिताता है। उन्होंने कहा कि युद्ध में जीत ही लक्ष्य होती है और हार कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने कहा कि मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष में भारत की सफलता उल्लेखनीय रही। ऑपरेशन सिंदूर संयुक्त सैन्य संचालन, समन्वय और एकीकृत रणनीति का उत्कृष्ट उदाहरण था। इस अभियान में जल, थल, वायु सेना के साथ अंतरिक्ष और साइबर क्षमताओं का भी प्रभावी उपयोग किया गया।
नई तकनीक अपनाना समय की जरूरत
जनरल चौहान ने कहा कि भविष्य के हर युद्ध का स्वरूप अलग होगा, इसलिए सेना को नई तकनीकों और रणनीतियों के अनुरूप खुद को लगातार विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और सैन्य व्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रह सकती।
उन्होंने कहा कि देशवासियों का सशस्त्र बलों पर विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। प्रत्येक सैनिक को अपने कर्तव्य, अनुशासन, ईमानदारी और निष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
उत्तराखंड से मजबूत हो सामरिक सोच
उन्होंने देश में सामरिक सोच को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा पूरे देश को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने देहरादून को अपना स्थायी निवास बनाया है और आगे भी उत्तराखंड से जुड़े रहेंगे।
समारोह में ऑल इंडिया गोरखा एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन ने जनरल अनिल चौहान का सम्मान किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री एवं गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
