रांची : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शनिवार को रांची स्थित ऑड्रे हाउस में आयोजित “आदि वार्ता – ए ट्राइबल कॉन्क्लेव” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सामुदायिक जीवन मूल्यों और प्रकृति के साथ गहरे संबंधों के लिए विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय परंपराएं सह-अस्तित्व, सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश देती हैं, जो न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर हैं।
राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय पहचान, संवैधानिक अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, शासन व्यवस्था, स्वदेशी ज्ञान परंपरा और सतत विकास जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का विकास तभी सार्थक माना जा सकता है, जब उसकी सांस्कृतिक अस्मिता और मूल पहचान सुरक्षित रहते हुए प्रगति का मार्ग प्रशस्त हो।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। विकास की प्रक्रिया में समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना और प्रत्येक नागरिक की सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने जनजातीय समाज के विकास में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास और आर्थिक सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए कहा कि विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों को मिलकर कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती गांवों के भ्रमण के दौरान उन्हें जनजातीय समाज की प्रतिभा, परिश्रम और सामुदायिक चेतना को करीब से देखने का अवसर मिला। राज्यपाल ने विशेष रूप से जनजातीय महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किए जा रहे उनके योगदान की सराहना की।
विश्व पर्यावरण दिवस का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का आधार मानता आया है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, तब जनजातीय जीवन-दर्शन यह संदेश देता है कि विकास और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सशक्तीकरण और समग्र विकास के लिए कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाना, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का विस्तार और पीएम-जनमन जैसी योजनाएं इसकी मिसाल हैं।
उन्होंने जनजातीय युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और तकनीक को अपनाएं। शिक्षा, खेल, प्रशासन, विज्ञान, कला और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ-साथ अपनी भाषा, लोककला, लोकसंगीत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं।
राज्यपाल ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित है और जनजातीय समाज देश की सांस्कृतिक विरासत तथा राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में जनजातीय समाज की सक्रिय भागीदारी, सम्मान और नेतृत्व को समान महत्व देने पर जोर देते हुए समावेशी और सशक्त समाज निर्माण का आह्वान किया।
