वाशिंगटन : अमेरिका में ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध संबंधी अधिकारों को सीमित करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर दिया है। बुधवार को हुए मतदान में 215-208 मतों से पारित इस प्रस्ताव में राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से रोकने की बात कही गई है।
इस प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक सांसदों ने पेश किया था, लेकिन इसे चार रिपब्लिकन सांसदों का भी समर्थन मिला। प्रस्ताव के अनुसार, जब तक कांग्रेस औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा नहीं करती या सैन्य बल प्रयोग की अनुमति देने वाला कानून पारित नहीं करती, तब तक राष्ट्रपति ईरान, उसकी सेना या सरकार के खिलाफ अमेरिकी सशस्त्र बलों का उपयोग नहीं कर सकते।
अब यह प्रस्ताव सीनेट में विचार के लिए जाएगा। हालांकि, यह एक समवर्ती प्रस्ताव है, इसलिए इसे कानून का दर्जा प्राप्त नहीं होगा और न ही इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बावजूद इसे कांग्रेस की राजनीतिक इच्छा और रुख का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
मतदान के बाद हाउस विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान के अनुरूप कदम उठाया है और अब प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि अमेरिका इस संघर्ष में किस उद्देश्य से शामिल हुआ।
वहीं हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप देश की सुरक्षा के लिए अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग जारी रखेंगे और कांग्रेस के साथ पारदर्शिता बनाए रखेंगे। प्रशासन का यह भी कहना है कि कुछ रिपब्लिकन सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण प्रस्ताव पारित हो सका।
यह युद्ध शुरू होने के बाद चौथा अवसर है जब प्रतिनिधि सभा में ईरान से जुड़े युद्ध अधिकारों पर मतदान हुआ है। इस घटनाक्रम ने अमेरिकी राजनीति में कार्यपालिका और कांग्रेस के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
