हरिद्वार : धर्मनगरी हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ और ‘वेज पुलाव’ को लेकर चल रहा विवाद अब नया रूप लेता दिख रहा है। अखंड परशुराम अखाड़े की पहल पर संत समाज, ब्राह्मण समाज और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने संयुक्त अभियान चलाकर कई दुकानों और ठेलों से ‘वेज बिरयानी’ के पोस्टर हटवाए और उनकी जगह ‘वेज पुलाव’ के पोस्टर व स्टिकर लगाए।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हवाला
अभियान का नेतृत्व श्री हिंदू तख्त के प्रदेश अध्यक्ष यश देव कौशिक ने किया। उनका कहना है कि हरिद्वार जैसे धार्मिक नगर में स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यापारी के व्यवसाय के खिलाफ नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं के सम्मान का प्रयास है।
जूना अखाड़े के संत एवं माया देवी मंदिर के पुजारी भास्करपुरी महाराज ने भी लोगों से ‘वेज बिरयानी’ के स्थान पर ‘वेज पुलाव’ शब्द के प्रयोग की अपील की।
मुस्लिम समुदाय ने भी दिया समर्थन
अभियान की खास बात मुस्लिम समुदाय की भागीदारी रही। मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि नौशाद अली ने संतों और ब्राह्मण समाज के साथ अभियान में शामिल होकर कहा कि सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी शब्द को लेकर किसी समुदाय की भावनाएं जुड़ी हैं, तो संवाद और सहमति के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए।
कई सामाजिक प्रतिनिधि रहे मौजूद
अभियान में संत समाज, ब्राह्मण समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आयोजकों का कहना है कि आगे भी जनजागरण के माध्यम से इस पहल को जारी रखा जाएगा, ताकि हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखा जा सके।
