1.78 लाख करोड़ का आंकड़ा… आखिर कैसे बदली भारत की ताकत?

नई दिल्ली।रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह ऐतिहासिक उपलब्धि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 1.54 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन के मुकाबले में 15.6 फीसदी की वृद्धि को दर्शाती है। मंत्रालय के मुताबिक इसके अलावा वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में इसमें 110 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जब रक्षा उत्पादन का आंकड़ा 84,643 करोड़ रुपये था। मंत्रालय ने कहा कि रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का कुल उत्पादन में करीब 76 फीसदी हिस्सा रहा, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान 24 फीसदी रहा है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 22 फीसदी से अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में निजी क्षेत्र का हिस्सा लगभग 42,000 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह रक्षा इकोसिस्टम में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा के उत्पादन में हुई वृद्धि ने वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड रक्षा निर्यात को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए रक्षा उत्पादन विभाग और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रगति देश के बढ़ते रक्षा औद्योगिक आधार का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने आगे कहा कि निरंतर नीतिगत समर्थन, कई नई पहलों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और निर्यात क्षमताओं में वृद्धि के साथ, रक्षा उत्पादन क्षेत्र आने वाले वर्षों में और भी तेजी से विकास करने के लिए तैयार है। देश के रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉड सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

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