भोपाल। खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए रविवार की रात बेहद खास रहने वाली है। आज ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आकाश में साल 2026 का सबसे छोटा पूर्ण चंद्रमा यानी ब्लू माइक्रो मून दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि एक ही रात में ब्लू मून और माइक्रो मून का संयोग बन रहा है।
मध्य प्रदेश की राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार, ब्लू मून नाम से भ्रमित होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि चंद्रमा नीले रंग का नहीं दिखाई देगा। खगोल विज्ञान में जब एक ही अंग्रेजी महीने में दो पूर्णिमाएं पड़ती हैं, तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है। मई 2026 में पहली पूर्णिमा 1 मई को थी, जबकि दूसरी पूर्णिमा 31 मई को पड़ रही है।
उन्होंने बताया कि इस बार पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपने सबसे दूर बिंदु, जिसे एपोजी कहा जाता है, के पास रहेगा। पृथ्वी से इसकी दूरी लगभग 4.06 लाख किलोमीटर होने के कारण यह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत छोटा और करीब 10 प्रतिशत कम चमकीला दिखाई देगा। इसी कारण इसे माइक्रो मून कहा जाता है।
सारिका घारू ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार यह ज्येष्ठ पूर्णिमा है और इस दौरान चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा। इसी वजह से इसे स्कॉर्पियो ब्लू मून भी कहा जा रहा है।
आज रात खगोल प्रेमियों को एक और खास दृश्य देखने को मिलेगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि के सबसे चमकीले लाल तारे एंटारेस के बेहद करीब नजर आएगा। यह नजारा पूरी रात बिना किसी दूरबीन या टेलिस्कोप के खुली आंखों से देखा जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लू मून की अगली प्रमुख घटनाओं के लिए लंबा इंतजार करना होगा। अगला सीजनल ब्लू मून 20 मई 2027 को, मंथली ब्लू मून 31 दिसंबर 2028 को पूर्ण चंद्रग्रहण के साथ और फिर 24 अगस्त 2029 को सीजनल ब्लू मून दिखाई देगा।
