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पूछताछ में बड़ा खुलासा : रांची के बाद लखनऊ को दहलाने की थी साजिश

रांची। रांची स्थित आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम हमले के मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि रांची में हमला करने के बाद लखनऊ में भी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। पुलिस के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर शाहबाज आलम उर्फ भट्टी और दुबई में बैठे आवेश राजपूत उर्फ राणा ने गिरफ्तार युवकों को लखनऊ में धमाके का टास्क दिया था।

लखनऊ पहुंचने का मिला था आदेश

गिरफ्तार लोहरदगा निवासी अमन अंसारी ने पूछताछ में बताया कि वीडियो कॉल के जरिए उसका संपर्क भट्टी और राणा से था। आरएसएस कार्यालय पर हमले से पहले दोनों ने निर्देश दिया था कि घटना के बाद आरोपी सीधे कानपुर पहुंचें और वहां से ट्रेन या बस के माध्यम से लखनऊ जाएं, जहां उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जानी थी।

पुलिस के अनुसार 17 जून को आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने के बाद अमन और सैफ कानपुर के लिए रवाना हुए थे, लेकिन कोडरमा के गझंडी स्टेशन के पास उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पाकिस्तानी हैंडलर ने भेजी थी लोकेशन

जांच में यह भी सामने आया है कि 15 जून को पाकिस्तानी हैंडलर ने अमन के मोबाइल पर रांची के निवारणपुर स्थित आरएसएस कार्यालय की तस्वीर और लोकेशन भेजी थी। इसके बाद हमले की पूरी योजना तैयार की गई।

हमले के बदले डेढ़ लाख रुपये का लालच

अमन ने पूछताछ में बताया कि भट्टी और राणा ने हमले के बदले तीनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये देने का वादा किया था। काम पूरा होने के बाद भुगतान करने की बात कही गई थी। इसी दौरान अमन ने रांची निवासी सायम सुजान से भी संपर्क कर उसे 50 हजार रुपये देने का प्रस्ताव दिया था।

कट्टरपंथी नेटवर्क चलाने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार शाहजाद भट्टी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़कर कट्टरपंथी नेटवर्क संचालित करता है। वह कथित रूप से “333” नामक नेटवर्क के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करता है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क युवाओं को गुमराह कर आपराधिक गतिविधियों में शामिल करने का काम करता है।

आईएसआई कनेक्शन की जांच

सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि भट्टी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर काम कर रहा है। जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से बेरोजगार और असंतुष्ट युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें पहले छोटे काम दिए जाते हैं और बाद में बड़ी साजिशों में शामिल किया जाता है।

लोहरदगा में एटीएस की छापेमारी

मामले की जांच के सिलसिले में एटीएस और स्थानीय पुलिस की टीम लोहरदगा स्थित अमन अंसारी और सैफ अंसारी के घर पहुंची। टीम ने दोनों के परिवार और आसपास के लोगों से पूछताछ की तथा कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं।

हथियार लाने पंजाब गया था अमन

अमन ने पुलिस को बताया कि वह राणा के कहने पर 8 जून को पंजाब गया था। वहां उसे एक व्यक्ति से संपर्क कर हथियार लेने का निर्देश दिया गया था। हालांकि हथियार उपलब्ध नहीं होने के कारण वह वापस लौट आया। इस काम के लिए उसे 10 हजार रुपये भी दिए गए थे।

पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं तथा यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

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