नई दिल्ली। राज्यसभा ने बुधवार को करीब एक घंटे तक चली चर्चा के बाद राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले यह विधेयक मंगलवार को लोकसभा से भी पारित हो चुका था। विधेयक पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह की गैरमौजूदगी को लेकर विपक्ष ने विरोध जताया और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सदन से बहिर्गमन किया।
सहकारिता राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक के जरिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) अधिनियम, 1962 में संशोधन किया गया है। इसका उद्देश्य निगम की वित्तीय क्षमता और अधिकारों का विस्तार करना है, ताकि वह सहकारी क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं और परियोजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सके।
सहकारी समितियों को सीधे वित्तीय सहायता का रास्ता साफ
राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश में आठ लाख से अधिक सहकारी संस्थाएं हैं, जिनसे लगभग 30 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद पिछले पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से देश की 80 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य जारी है।
उन्होंने कहा कि संशोधन कानून बनने के बाद पात्र सहकारी समितियों और सहकारिता विकास से जुड़ी संस्थाओं को सीधे ऋण और वित्तीय सहायता मिल सकेगी। एनसीडीसी अब कृषि और पशुधन के अलावा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों तथा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य वस्तुओं से जुड़ी परियोजनाओं को भी सहायता दे सकेगा। साथ ही विभिन्न सहकारी संस्थाओं और विकास से जुड़ी इकाइयों की शेयर पूंजी में निवेश का अधिकार भी निगम को मिलेगा।
अमित शाह की गैरमौजूदगी पर सदन में तीखी बहस
विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि चूंकि विधेयक से संबंधित मंत्रालय के प्रमुख अमित शाह हैं, इसलिए उन्हें सदन में उपस्थित होना चाहिए। इस पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष चर्चा से बचने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हंगामे के बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।


